
अष्टांग योग — भाग 1
अष्टांग योग — भाग 1 ध्यान से पहले शरीर और मन का शोधन क्यों आवश्यक है? प्रिय मित्र, आज मन में एक महत्वपूर्ण बात आई,

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क्षणभंगुर: जीवन अभी है, बाद में नहीं जीवन की क्षणभंगुरता को समझने और वर्तमान में जागने का आह्वान जीवन बहुत छोटा है। इतना छोटा कि

खाली नाव: क्रोध घटना से नहीं, हमारी व्याख्या से पैदा होता है घटना और हमारी मानसिक व्याख्या के बीच छिपा क्रोध का रहस्य हम किसी

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स्वार्थ: क्या हम सच में जी रहे हैं? हम जी रहे हैं? या केवल खा रहे हैं, सो रहे हैं और अपने छोटे-से स्वार्थ के

गुरु माउली: गुरु केवल सिखाता नहीं, चेतना को जन्म देता है महाराष्ट्र में गुरु के लिए एक अत्यंत सुंदर शब्द है— “गुरु माउली”। माउली अर्थात

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